आज हम आपको राजा कसूमार भील के गौरवशाली इतिहास के बारे में बताने जा रहे हैं। आज जो आदिवासी समुदाय यह मशहूर मेला “भगोरिया पर्व” देखते है, वह इस राजा कि देन है। भील गाने और कहावतें यह साबित करती हैं कि राजा कसूमार भील (History Of Raja Kasumer Bhil) के गौरवशाली इतिहास राहा हे.
देश के सबसे महान आदिवासी अजेय राजा कसुमर भील, वह अजेय राजा जिसे हराया नहीं जा सकता था और जो युद्ध कला में माहिर योद्धा राजा था, वह था राजा कसुमार भील उस के बारे में जानकारी और गौरवशाली इतिहास इस प्रकार है:
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राजा कसूमार भील का इतिहास
भील राजा कसुमेर ‘भगोर’ (वर्तमान झाबुआ क्षेत्र) के एक ऐतिहासिक भील राजा थे, वे भलाई करने वाले राजा के तौर पर सबसे महान राजवंशों में से एक राजा कसुमर (कसूमर) भील कहलाते थे, 1009 ईस्वी में जन्मे भील राजा कसुमेर ने आदिवासी समुदाय के लिए मशहूर मेला “भगोरिया पर्व” कि शूरवात कि थी. राजा कसुमर (कसूमर) भील को “भगोरिया पर्व का संस्थापक” भी माना जाता है।
जन्म:
उनके जन्म की सटीक तिथि उपलब्ध नहीं है पर 1009 ईस्वी में ‘भगोर’ (वर्तमान झाबुआ क्षेत्र) में हुवा था. राजा कसूमार भील झाबुआ क्षेत्र के एक ऐतिहासिक भील राजा थे, वे परमार राजा भोज के समकालीन थे और उनका विवाह राजा भोज की पुत्री हीमल से हुआ था।
सोच:
उन्होंने 1009 ईस्वी में अपनी राजधानी ‘भगोर’ (वर्तमान झाबुआ क्षेत्र) में इस उत्सव की शुरुआत की थी।
ऐतिहासिक महत्व :
राजा कसूमार भील का इतिहास बहुत बड़े इलाकों में फैला हुआ है। लेकिन, उन्होंने न सिर्फ़ राजधानी ‘भगोर’ तक अपना राज कायम नही किया, बल्कि दुनिया के इतिहास के सबसे महान राजवंशों में से एक राजा कसुमर (कसूमर) भील को बनाया और बनाए रखा।
शासन शैली :
1009 ईस्वी में, लोगों के हितैषी राजा कसुमार भील, जो अपनी राजधानी भगोर (आज का झाबुआ इलाका) से राज करते थे, लोगों की भलाई करने वाले राजा के तौर पर जाने जाते थे। आदिवासी समुदाय उन्हें एक न्यायप्रिय राजा कहते थे। लोग हमेशा उन्हें भील संस्कृति का लीडर मानते थे।
युद्ध:
वह अजेय राजा जिसे हराया नहीं जा सकता था और जो युद्ध कला में माहिर योद्धा राजा था, वह था राजा कसुमार भील।
इलाका:
वह भगोर इलाके के राजा थे, जहाँ उन्होंने और राजा बालुन (बालुन) ने अपनी राजधानी से राज किया। जिन्हें प्रसिद्ध भगोरिया पर्व का संस्थापक माना जाता है। वे परमार राजा भोज के समकालीन थे और उनका विवाह राजा भोज की पुत्री हीमल से हुआ था।
महत्व:
भगोरिया, एक बड़ा आदिवासी मेला, राजा कसूमार भील के राज में शुरू हुआ था। और आज के समय मे गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, राजस्थान मे बडे धूम धाम से प्रसिद्ध भगोरिया पर्व का उत्सव का आनंद आदिवासी समुदाय लेते हे माना जाता है कि राजा कसुमार भील (History Of Raja Kasumer Bhil) का राज और भगोरिया मेला लगभग 1009 ईस्वी का था।
विरासत और सम्मान:
- प्रसिद्ध भगोरिया: 1009 ईस्वी में अपनी राजधानी ‘भगोर’ (वर्तमान झाबुआ क्षेत्र) में इस उत्सव की शुरुआत की थी।
- आदिवासी प्रतीक: आदिवासी समुदाय के लिए प्रसिद्ध भगोरिया पर्व की शुरुआत की थी। आदिवासी समुदाय आज भी प्रसिद्ध भगोरिया पर्व का आनंद लेते हे. उन्हें “भगोरिया पर्व का संस्थापक” माना जाता है।
ऐतिहासिक भील राजा
राजा कसूमार भील झाबुआ इलाके के एक पुराने भील राजा थे। झाबुआ इलाके के राजा कसुमेर डामोर ने 1009 ईस्वी में अपनी राजधानी भगोर में भगोरिया हाट शुरू किया था। हर साल यह त्योहार मनाते हुए, राजा कसुमेर डामोर ने इसका नाम भगोर रखा। इस दौरान, राजा कसूमार भील झाबुआ अंचल के एक ऐतिहासिक भील राजा थे, राजा कसुमेर भील ही भगोरिया त्योहार के संस्थापक थे।
भगोरिया हाट का इतिहास:
राजा कसूमार भील अपने परिवार के साथ भील समुदाय के साथ त्योहार मनाने के लिए भगोर मैदान जाते थे। यह त्योहार लगभग 1009 से चला आ रहा है। आस-पास के गांवों से भील लोग इस त्योहार को बड़ी खुशी से मनाने के लिए भगोर आते थे। हर तबके के लोग इसमें जोश के साथ हिस्सा लेते थे। जवान लड़के और लड़कियां, खासकर जवान लड़कियां, अच्छे कपड़े पहनकर और लड़कियां सोने-चांदी के गहनों से सजकर त्योहार का मज़ा लेते थे।
हर गांव से भील लड़के अपने गांव का बड़ा ढोल और थाली बजाने के लिए लाते थे। ढोल की थाप पर भील लड़के और लड़कियां नाचते और गाने गाते थे। हज़ारों भील आदमी अपना पसंदीदा इंस्ट्रूमेंट, बांसुरी बजाते थे, जिससे माहौल खुशनुमा हो जाता था। रंग-बिरंगे कपड़े पहने भील समुदाय बड़ी संख्या में ढोल, झांझ, बांसुरी, गोफन, फाल और धनुष-बाण लेकर आते थे।
भील समुदाय आदमी अपने भील शैली कि एक सफेद पगड़ी, ऊपर एक काली पगड़ी और एक बड़ी सफेद पगड़ी पहनते थे। पगड़ी में एक पीरगंधा और एक गोफन होता था। भील औरतें रंग-बिरंगे घाघरा पोल्का, गले में सोने-चांदी और पैरों मे अंगूठियां और हाथों में चांदी की चूड़ियां पहनती थीं, जो एक खास आकर्षण होता था। सभी भील समुदाय ढोल की थाप पर नाचते थे।
भगोरिया हाट
भगोरिया मेले को लेकर समाज में कई गलतफहमियां फैलाई जाती हैं, लेकिन ऐसा कुछ नहीं है। भील राजा कसुमेर ने भगोरिया हाट इसलिए शुरू किया ताकि इस मेले में आदिवासी समुदाय कई ज़रूरी चीज़ें खरीद सकते हैं, समय बचा सकते हैं और मेले का मज़ा ले सकते हैं। जैसे आज हाट बाज़ार लोगों से भरा रहता है, वैसे ही लोग साल में एक दिन इस भगोरिया हाट में नई चीज़ें और नई सामान खरीद सकते हैं।
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FAQ
राजा कसुमेर भिल कौन थे?
राजधानी ‘भगोर’ तक अपना राज कायम रखने वाला, दुनिया के इतिहास के सबसे महान राजवंशों में से एक राजा कसुमर भील थे।
राजा कसुमेर भिल जन्म कहा हुवा था?.
1009 ईस्वी में ‘भगोर’ (वर्तमान झाबुआ क्षेत्र) में राजा कसुमेर भिल जन्म हुवा था।
राजा कसुमेर भिल का कार्य कैसा था?
हितैषी राजा कसुमार भील, जो अपनी राजधानी भगोर (आज का झाबुआ इलाका) से राज करते थे, लोगों की भलाई करने वाले राजा के तौर पर जाने जाते थे। ऐसे कसुमेर भिल राजा था।
राजा कसुमेर भिल कहा के थे?
राजा कसुमेर भिल राजधानी भगोर (आज का झाबुआ इलाका) के थे ।
राजा कसुमेर भिल का इतिहास क्या हे?
राजा कसूमार भील का इतिहास बहुत बड़े इलाकों में फैला हुआ था। राजधानी ‘भगोर’ तक अपना राज और दुनिया के इतिहास के सबसे महान राजवंशों में से एक राजा कसुमर भील को बनाया और बनाए रखा।
निष्कर्ष
झाबुआ अंचल के एक ऐतिहासिक भील राजा थे और भगोरिया पर्व का संस्थापक हे. उन्होंने 1009 ईस्वी में अपनी राजधानी ‘भगोर’ (वर्तमान झाबुआ क्षेत्र) में इस उत्सव की शुरुआत की थी, राजा कसुमेर भिल जानकारी अच्छी लगी हो तो, अपने मित्रो को शेअर करे और नयी जानकारी के लिये हमारे सोसीअल मेडिया ग्रुप मे जॉईन हो सकते हे.